ganesh ji ki aarti | गणेश जी की आरती

भगवान गणेश की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है, भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है.
Ganesh Aarti: गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। 10 सितंबर से इस पर्व की शुरुआत हुई है जो 19 सितंबर तक चलेगा। पूरे 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में लोग अपने घर में भगवान गणेश की प्रतिमा लाते हैं और उनकी विधि विधान पूजा करते हैं। इसके बाद एक निश्चित दिन पर इस प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है.
गणेश जी की पूजा के समय सबसे जरूरी होती है उनकी आरती (ganesh ji ki aarti ) | गणेश जी की आरती जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है यहां देखें गणपति जी की आरती इस पावन दिन गणेश जी की आरती जरूर करें। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम को करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करनी बेहद जरूरी होती है।भगवान श्री गणेश सभी देवताओं में पूजनीय है। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी विघ्न-बाधाएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं.
भगवान श्री गणेश को एकदंत के नाम से भी पुकारा जाता है। वहीं उनको व‍िघ्‍नहर्ता का नाम भी दिया गया है, ऐसी मान्यता है, कि भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना यदि  ना की जाए, तो कोई भी कार्य सफल नहीं हो पाता है। धर्म के अनुसार भगवान | गणेश जी की आरती को शुभ माना  ज्याता  है.

 यहां आप भगवान श्री गणेश की आरती लिरिक्स के साथ पढ़ सकते है। आगे पढ़ें गणेश जी की आरती ganesh ji ki aarti lyrics... 

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ganesh ji ki aarti | गणेश जी की आरती



ganesh ji ki aarti lyrics video:




ganesh ji ki aarti गणेश जी की आरती


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

----- Additional -----
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥


(ganesh aarti ) शेंदूर लाल चढाओ aarti:


शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको । दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।

हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको । महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥१॥

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता, जय देव जय देव ॥ध्रु०॥

अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि । विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।

कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी । गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥२॥

॥ जय देव जय देव०॥

भावभगत से कोई शरणागत आवे । संतत संपत सबही भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे । गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥३॥

॥ जय देव जय देव०॥


(ganesh aarti ) वेदशास्त्रांमाजी तूं मंगलमूर्ती aarti:


वेदशास्त्रांमाजी तूं मंगलमूर्ती। अगणित महिमा तुझा कल्याण स्फूर्ती॥
भक्तांलागी देसी विद्या अभिमत ती। मोरेश्वर नाम तुझे प्रसिद्ध या जगती ॥१॥

जय देव जय देव जय मोरेश्वरा। तुझा न कळे पार शेषा फणिवरा ॥ध्रु०॥

पुळ्यापश्ये नांदे महागणपती। माघ चतुर्थीला जनयात्रे येती।।
जें जें इच्छिति तें तें सर्वही पावती। गणराजा मज बाळा द्यावी अभिमती ॥२॥

॥ जय देव जय देव०॥


एकवीस दुर्वांकुरा नित्ये नेमेसी। आणूनि जे अर्पिती गणराजयासी॥
त्याचे तू भवबंधन देवा चुकविसी। विठ्ठलसुत हा ध्यातो तुझिया चरणासी॥ जय देव जय देव जय मोरेश्वरा॥३॥

॥ जय देव जय देव०॥